हर जन्म में तेरी हीर बनूंगी। 

उन आँखों को न खोलूं मैं, 

जिन आँखों में तू रहता हो। 


उन ख्वाबो को न देखूं मैं, 

जिनमे न तू मिलता हो। 


उन राहो पर मेरे रास्ते हो, 

जिन राहो पर तू चलता हो।


तेरे संग वहाँ तक चल दूं मैं, 

जहाँ पर सूरज ढलता हो। 


उस रात की सुबह मैं न होने दूं, 

जिस रात तेरा ख्वाब मुझमें पलता हो। 



नदिया बन बह लूंगी मिलने को, 

अगर तू सागर बनकर बहता हो। 


शमां बन जाऊँगीं तुझ संग, 

अगर तू परवाना बनकर जलता हो। 


हर जन्म में तेरी हीर बनूंगी, 

बस तू रांझा बनकर मिलता हो। 

       -आस्था गंगवार 






Astha gangwar द्वारा प्रकाशित

its me astha gangwar . I m founder of this blog. I love to write poems... I m a student of msc to chemical science.... read my poems on facebook - https://www.facebook.com/asthagangwarpoetries/ follow me on - I'm on Instagram as @aastha_gangwar_writing_soul

20 विचार “हर जन्म में तेरी हीर बनूंगी। &rdquo पर;

  1. वाह आस्था जी दिल छू गया । आस्था जी मैं एक प्रयासरत सिंगर हु मेरा u tube channel ambikanti music है मैं आपसे आग्रह करना चाहता हु की आप मुझे एक गाना लिखकर देने की कृपा करें। आप यदि चाहे तो मेरे u tube channel पे मेरी आवाज सुन सकती हैं मेरा u tube channel है ambikanti music यदि आप मेरी आवाज को अपने शब्द देने के लायक समझे तो कृपया मुझे 6201478341 पर सम्पर्क करें।

    मुझे आपके उत्तर की प्रतीक्षा रहेगी
    आपका प्रशंशक
    रंजीत लल्ला

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