Watch “Hindi poem -मेरा मन और पतझड़ BY Astha gangwar ©” on YouTube

Advertisements

वास्तविकता 

वास्तविकता को सुनने, पढ़ने, कहने, लिखने से लोग मृत्यु से भी ज्यादा डरते हैं और डर को स्वीकार करना मुझे लगता है इस संसार का सबसे कठिन कार्य है। 

        -आस्था गंगवार © 

कब से लिये बैठी थी उम्मीदें। 

कब से लिये बैठी थी उम्मीदें, 

रोशनी अब आयी है। 

पड़ा था परदा अँधेरे का ,

काली घटा छँट आयी है। 

चमक रहा सूर्य गगन में,

इरादों में जान आयी है। 

निराशा का धुंआ उङ़ गया, 

हौसले की नहीं अब कमतायी है। 

       -आस्था गंगवार © 

तेरे बिना दिन मेरा नहीं बुझता। 

तेरे बिना दिन मेरा नहीं बुझता, 

तेरे बिना रात नहीं जलती। 

एक लम्हा लगे गुजर गयी सदियां, 

तेरे बिना ये साँसे भी नहीं चलती। 

      -आस्था गंगवार © 

सोये भी उनको याद कर थे। 

सोये भी उनको याद कर थे, 

जागकर भी उन्ही का चेहरा तलाशते हैं। 

अभी उनसे ख्वाब में मिलकर आये हैं, 

अब फिर बेकरार मिलने को तरसते हैं। 

       -आस्था गंगवार ©