एक स्त्री की वेदना। 

कतरा कतरा बिखरती जाती है 

भरे बाजार में वासना भरी नजरो से जब लूटी जाती है 

आहत मन अंधकार से भर जाता है महफिल में जब बेंची जाती है 

कहते हैं ममता की मूरत है नारी 

प्रेम का श्रंगार है नारी 

सहनशीलता की देवी है 

वेदो में पूजनीय है नारी 

इतनी अनमोल होकर भी उसकी कीमत क्यों आंकी जाती है 

जमाने के दस्तूरो का बोझ लादा जाता है 

बुरी नजरो से बचने को हिजाब पहनने को कहा जाता है 

रीति रिवाजो की जंजीरो में जकङी जाती है 

पवित्रता साबित करने को अग्नि परीक्षा भी ली जाती है 

दोष किसी का भी हो आंच मुझ पर ही आती है 

जालिम जमाने में जीने की चाह खत्म सी होती जाती है 

मेरे असीम अस्तित्व पर जब उंगली उठायी जाती है 

दुनिया मे आने से पहले ही मेरे अस्तित्व पर खतरा मंडराता है 

फिर इस दुनिया मे आने पर सोचो मेरा हाल…………….

मै चीखती हूँ मुझे जीने दो मेरी आवाज को दबाया जाता है 

मासूम, बेबस, लाचार स्थिति को स्वीकार कर लेती है 

छोटी सोच, शीलहीन लोगों द्वारा कोख में ही मारी जाती है। 

-आस्था गंगवार 

Astha gangwar द्वारा प्रकाशित

its me astha gangwar . I m founder of this blog. I love to write poems... I m a student of msc to chemical science.... read my poems on facebook - https://www.facebook.com/asthagangwarpoetries/ follow me on - I'm on Instagram as @aastha_gangwar_writing_soul

22 विचार “एक स्त्री की वेदना। &rdquo पर;

  1. अतुलनीय है अनुकरणीय है।नारी हर जगह पूजनीय है।दुर्गा है काली है।महिमा उसकी निराली है।माँ बन के वो जग को पाले।मित्र बने तो साथ निभाए।जब बढ़े जग में अत्याचार तो वही करे संघार।सच ही कहा है अतुलनीय है अनुकरणीय है।नारी हर जगह पूजनीय है।

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