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एक लेखक की यात्रा।

एक लेखक, एक कवि दूसरे मनुष्यों की तुलना में अपनी भावनाओं के साथ बहुत ईमानदार होता है। कवि इतना संवेदनशील होता है कि आसमान से चली आ रही है एक बूँद जो वर्षा का अंश है। धरती पर आकर अपना रूप बदल लेगी परन्तु एक लेखक इसको भी इतनी मार्मिकता से देखता है कि उसपढ़ना जारी रखें “एक लेखक की यात्रा।”

इस बार लौटकर मत जाना ।

तुम आओ तो इस बार लौट कर मत जाना। मन के बगीचे में हरियाली तुम्ही से खिले फूलों को फिर से नहीं है मुरझाना। तुम बिन हर एक क्षण है पतझड़ अकेले तुम बिन अब नहीं है एक पल बिताना। तुम आओ तो इस बार लौट कर मत जाना। तुम बिन हाल एेसा जैसे पानीपढ़ना जारी रखें “इस बार लौटकर मत जाना ।”

छुईमुईरूपी प्रेम बंधन

प्रेम की डोरी से बँधा रिश्ता छुईमुई के पौधे के समान है जिसे छूने भर से वह मुरझा जाता है परन्तु कुछ समय बाद पुनः खिल उठता है। ठीक वैसे ही क्षण भर की नोंक-झोंक के स्पर्श मात्र से मन मुरझा जाता है और हजारों नकारात्मक विचार हृदयों के बीच एक बर्फ का पहाड़ खड़ापढ़ना जारी रखें “छुईमुईरूपी प्रेम बंधन”

तुम्हारी मुस्कान हो मेरा जीवन हो।

जिस क्षण तुम मुझे स्वयं से अलग करो, वह मेरे जीवन का अन्तिम क्षण हो। न चाह रहे फिर कुछ पाने की, मृत्यु पार भी सिर्फ तुम ही तुम हो। विलग होकर तुमसे मिले अमरता, हँसकर वह भी मुझे अस्वीकार हो। या दे ईश्वर सारा जग मुझको तुम बिन, कोई स्वार्थ कभी न तुमसे बढ़करपढ़ना जारी रखें “तुम्हारी मुस्कान हो मेरा जीवन हो।”

शिक्षा, शिक्षा रही नहीं।

शिक्षा, शिक्षा रहीं नहीं, व्यापार बना अब डाला है। मंदिर कहलाता था विद्यालय, अब वहाँ स्वार्थ ने बागडोर संभाला है। व्यवहारिक शिक्षा का पतन हुआ, संस्कार जीवन में कैसे आयेंगे। रटने की पद्धति का जमाना है, नवाचार कैसे कर पायेंगे। साधन नहीं बढ़कर जीवनमूल्य से, सिखलाने वाला गुरु अब रहा नहीं। माँ भी दूसरों सेपढ़ना जारी रखें “शिक्षा, शिक्षा रही नहीं।”