मेरा ह्दय 

तेरे चक्षु के प्रतिबिम्ब, 

को देख ह्दय मचलता है 

बसता है वहां प्रेम का सागर, 

नदिया बन मिलने को बहता है 

तेरी स्मृति के मौसम में, 

कभी बसंत के फूलो सा खिलता है 

तेरी यादो की उधेङबुन में, 

कभी पतझङ बनकर झङता है 

तेरे प्रेम का आलोक पाकर ,

कभी दीपक बनकर जलता है 

विरह की आँधी जब बहती जाये, 

व्याकुल होकर बिन बादल बरसता है 

ग्रहण लगा हो जैसे चाँद पर, 

ऐसे ही अपना नूर खोता है 

तेरी तस्वीर बनाने खातिर, 

धूमिल सी चांदनी बिखेरता है 

नयनो से बहता नीर, 

आंसमाँ के तारो सा झिलमिलाता है 

दरिया जो बहता बीते पलो का, 

कभी सूरज बनकर ढलता है 

सर्द हवाओ सा ठहरा है तुझ बिन, 

धूृप छांव सी अंगङाई लेता है 

तुझे खोजता बंजारा बन, 

जुगनू सा जलता बुझता है 

लहर बन हिलोरे लेकर, 

वापस तेरे समुन्दर में जा मिलता है 

बङा बाँबरा मतवारा है, 

तेरी खातिर रास्ता- रास्ता फिरता है 

न कुछ सोचे न कुछ समझे 

बस तेरी प्रीत के नाम खत लिखता है। 

      -आस्था गंगवार 

Teri chakshu ke pratibimb

ko dekh Harday machlta h 

Bsta h waha prem ka sagar 

Nadiya bn milne ko bahta h 

Teri smrati ke mausam me 

Kbhi basant ke foolo sa khilta h 

Teri yado ki udherbun me 

Kbhi Ptjhad bnkr jhadta h 

Tere prem ka alok pakar 

Kbi deepak bnkr jalta h 

Virah ki andhi jb bahti jae 

Vyakul Hokar bin badal barsata h 

Grahan lga ho jaise chand pr 

Aise hi apna noor khota h 

Teri tasbeer bnane khatir 

Dhoomil si Chandni bikherta h 

Nayano se bahta Neer 

Asma ke taro sa jhilmilata h 

Dariya jo bahta Beete palo ka 

Kbi sooraj bnkr dhalta h 

Sard hawao sa thahra h tujh bin 

Dhoop chaawn si angdai leta h 

Tujhe khojhta bnzara bn 

Jagnu sa jalta bujhta h 

Lahar bn hilore lekr 

Waps tere samundar me ja milta h 

Bda bawra mtwara h 

Teri khatir Rasta rasta firta h 

Na kuch soche na kuch smjhe 

Bs teri preet ke naam khat likhta h… 

  -Astha gangwar 

Astha gangwar द्वारा प्रकाशित

its me astha gangwar . I m founder of this blog. I love to write poems... I m a student of msc to chemical science.... read my poems on facebook - https://www.facebook.com/asthagangwarpoetries/ follow me on - I'm on Instagram as @aastha_gangwar_writing_soul

28 विचार “मेरा ह्दय &rdquo पर;

  1. बहुत बढ़िया..
    आप काफ़ी खूबसूरती से भावनाओं को शब्दों का रूप देती है.. अब हिन्दी भाषा का ध्यान रखते हुए उचित स्थान पर बिंदी लगाने का भी ध्यान रखें.. रचना में चार चाँद लग जाएंगे..😊

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