प्यार का अफसाना 

तू साथ होता है तो बात बात पर झगङती हूँ 

नहीं होता तो तेरा साथ याद करती हूँ 

तेरी बेबाक सी बातो को बेपरवाही से सुनकर 

यूंही कभी कभी तेरे साथ तो कभी अकेले हंसती हूँ 

तेरे साथ खो गयी कहीं मेरी सारी तन्हाइयां 

सबको छोङकर सिर्फ तेरा साथ ही चुनती हूँ 

रिश्ते की डोर बंधने लगी हम दोनों के दरमियां 

बस कभी कभी साथ होने की वजह सोचती हूँ 

अकेले बैठ याद आता तेरे साथ बिताया हर पल 

और रातो में अक्सर तेरे ख्वाब बुनती हूँ 

तू साथ होता तो कुछ बात अलग होती 

फिर दूर होने का एहसास महसूस करती हूँ 

कभी बातो से तो कभी बिन कहे एक दूसरे का हाल समझते है 

दिल मिल गये अब दूरियो की परवाह नहीं करती हूँ 

सताती हूँ तुझे जब भी अपनी नादानियों से 

सोचती हूँ तकलीफ दी और उदास फिरती हूँ 

अकेले बैठ तेरी यादो में अक्सर 

अपने प्यार के अफसाने लिखती हूँ। 

        -आस्था गंगवार 

Astha gangwar द्वारा प्रकाशित

its me astha gangwar . I m founder of this blog. I love to write poems... I m a student of msc to chemical science.... read my poems on facebook - https://www.facebook.com/asthagangwarpoetries/ follow me on - I'm on Instagram as @aastha_gangwar_writing_soul

40 विचार “प्यार का अफसाना &rdquo पर;

  1. पिंगबैक: Quotes Challenge #1 – Fab Writings
  2. ‘तू साथ होता है तो बात बात पर झगङती हूँ

    नहीं होता तो तेरा साथ याद करती हूँ

    तेरी बेबाक सी बातो को बेपरवाही से सुनकर

    यूंही कभी कभी तेरे साथ तो कभी अकेले हंसती हूँ ‘
    क्या बात है आस्था जी बहुत खूब,
    शुरुवात में ही बहुत कुछ लिख दिया!

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