बेजुबाँ नैनो को पढ न सको। 

प्रीत न लगाना किसी से 

अगर प्रीत निभा न सको 

हाथ थामकर चलने की बात न करना किसी से 

अगर हाथ थामकर चल न सको 

वादा न करना किसी से 

अगर वादे पर अमल कर न सको 

हमराही बनने की बात न करना किसी से 

अगर सूनी राहो पर मिल न सको 

ओंठो की मुस्कान बनने की बात न करना किसी से 

अगर प्यार का रंग भर न सको 

महफिल में साथ निभाने की बात न करना किसी से 

अगर तन्हायी मे साथ दे न सको 

चाहत की लम्बी कहानी न कहना किसी से 

अगर ढाई अक्षर प्रेम के कह न सको 

जज्बात पढने की बात न करना किसी से 

अगर बेजुबाँ नैनो को पढ न सको। 

-आस्था गंगवार 

Astha gangwar द्वारा प्रकाशित

its me astha gangwar . I m founder of this blog. I love to write poems... I m a student of msc to chemical science.... read my poems on facebook - https://www.facebook.com/asthagangwarpoetries/ follow me on - I'm on Instagram as @aastha_gangwar_writing_soul

12 विचार “बेजुबाँ नैनो को पढ न सको। &rdquo पर;

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