इंसान को हँसना और जीना सिखाता है। 

आँखों से बहते जज्बात जो बनके मोती 

समझने वालो के लिए दर्द की निशानी 

न समझने वालो के लिए सिर्फ बहता पानी 

इंसान ने चेहरे पर नकाब पहना है 

जो वह नही है वह होने का हिजाब पहना है 

जमाने के दस्तूरो की चादर ओढ के बैठा है 

अपनो के दर्द से अब मुँह फेर लेता है 

जो दर्द सहने की आदत डाल लेता है 

ईश्वर भी उसको ही मुसीबते देता है 

दर्द और गरीबी का करीब से नाता है 

गरीबी में इंसान ठीक से रो भी नहीं पाता है 

पर वह परमेश्वर सब पर रहम फरमाता है 

और बुरे हालात मे भी अक्सर खुशी देकर 

इंसान को हँसना और जीना सिखाता है। 

-आस्था गंगवार 

Ankho se bahte jajbat jo banke moti 

Smjhne walo ke liye dard ki nishani 

Na smjhne walo ke liye sirf bahta pani 

Insan ne chehre pe nakab phna h 

Jo wah nhi h wah hone ka hijab phna h 

Zamane ke dastooro ki chadr odhke baitha h 

Apno ke dard se ab muh fer leta h 

Jo dard sahne ki adt dal leta h 

Ishwar bhi usko hi musivate deta h 

Dard aur gareebi ka karib se nata h 

Gareebi me insan thik se ro bhi nhi pata h 

Pr wo prmeshwar sb pr raham frmata h 

Aur bure halat me bhi aksar khusi Dekr 

Insan ko hsna aur jeena sikhata h. 

-Astha gangwar 

Astha gangwar द्वारा प्रकाशित

its me astha gangwar . I m founder of this blog. I love to write poems... I m a student of msc to chemical science.... read my poems on facebook - https://www.facebook.com/asthagangwarpoetries/ follow me on - I'm on Instagram as @aastha_gangwar_writing_soul

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